जेन-जी पर आंख मूंदकर विश्वास, वे राष्ट्रविरोधी नहीं: भागवत
- न्यूज़ डेस्क
- 06/08/2026
- महाराष्ट्र
- आईआईएमयूएन, आरएसएस, जेन-जी, मुंबई
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मुंबई। नीट पेपर समेत अन्य पार्टियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली से त्रस्त युवाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार (6 अगस्त, 2026) को न केवल जेन-जी और जेन-अल्फा से संपर्क स्थापित किया बल्कि उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। संघ प्रमुख ने नई पीढ़ी पर विश्वास जताया और शिक्षा, बेरोजगारी, अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों समेत अन्य विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
यह संवाद ‘इंडियास इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स’ (आईआईएमयूएन) के पंद्रह वें सम्मेलन में आयोजित किया गया। यह युवाओं द्वारा संचालित दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में से एक है। जिसकी स्थापना 2011 में हुई थी। इस तीन दिवसीय सम्मेलन (6 से 8 अगस्त 2026) में दो हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया था।
सरसंघचालक ने कहा कि नई पीढ़ी इसी समाज का हिस्सा है, हमें उन्हें समझने केे आवश्यकता है। मतभेदों के बाद भी, संवाद जारी रहना चाहिए। प्रत्येक समस्या का हल बातचीत से निकाला जा सकता है।
श्री भागवत ने कहा, “जो कुछ भी हुआ, उस पर जेन-जी की शिकायत उचित है। भारतीय शिक्षा प्रणाली में अमूलचूल परिवर्तन करने केे आवश्यकता है, चूंकि ऐसा नहीं हो रहा है इसलिए चर्चा हो रही है”। जेन-जी का किसी मुद्दे पर विरोध करना उन्हें किसी भी प्रकार से देशविरोधी नहीं बनाता। मैं उनपर आंख मूंदकर विश्वास रखूंगा। लोकतंत्र में प्रदर्शन भी एक सहमति बनाने तरीका है। विरोध किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए होना चाहिए।


