कारगिल विजय दिवस, भारतीय सेना की वीरता का परिचायक
- न्यूज़ डेस्क
- 26/07/2026
- राष्ट्रीय
- कारगिल विजय दिवस, भारतीय सेना
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न्यूज़ डेस्क। कारगिल विजय दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को भारत की पाकिस्तान पर 1999 में हुई विजय को चिन्हित करने के लिए एवं उन 527 वीर सैनिकों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च वलिदान दे दिया।
वर्ष 1998, भारत और पाकिस्तान द्वारा किए गए परमाणु परीक्षणों के चलते दोनों देशों के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था। इस तनाव को काम करने एवं क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बनाए रखने के लिए 21 फरवरी 1999 को लाहौर घोषणा-पत्र (Lahore Declaration) भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच लाहौर में हुआ।
लेकिन इस समझौते के बाद पाकिस्तान “ऑपरेशन बद्र” के अंतर्गत अपने सैनिकों और अर्ध-सैनिक बलों को छिपाकर नियंत्रण रेखा के पार घुसपैठियों के रूप में भेजने लगा। इस घुसपैठ का मुख्य उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख को अलग करना और भारतीय सेना को सियाचिन ग्लेशियर से हटाना था। पाकिस्तान इस क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता को बढ़ाकर कश्मीर मुद्दे को एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाना चाहता था।
प्रारम्भ में इस घुसपैठ को सामान्य मान लिया गया, परंतु शीघ्र ही योजना के बहुत बड़े पैमाने पर होने का अनुमान भारतीय सेना को हो गया। इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय प्रारंभ किया। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य कारगिल और द्रास सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार से घुसपैठियों के रूप में आए पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ना तथा भारतीय क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण हासिल करना था। यह युद्ध लगभग 2 महीने चला एवं आधिकारिक रूप से 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ।


