भारत में गरम रह सकती हैं सर्दियाँ, गेहूँ की पैदावार पर गहराया संकट
एल नीनो के बढ़ते प्रभाव की आशंका ने भारत समेत कई अन्य देशों की चिंता को बढ़ा दिया है। विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) के अनुसार एल नीनो का प्रभाव वर्षांत में बढ़ सकता है एवं नव वर्ष के शुरुआती महीनों में भी इसका प्रभाव बना रहेगा। इससे गेहूँ की पैदावार और जल संसाधन प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।
भारत के लिए आने वाले महीने कठिन हो सकते हैं। इसी वर्ष मानसून सीजन में सामान्य से 13 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। एल नीनो के मजबूत होने से यह प्रश्न उठ खड़ा हो गया है कि क्या सर्दियों में तापमान बढ़ सकता है एवं कृषि उपज को प्रभावित कर सकता है?
जब मध्य और पूर्वी भूमध्य रेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, तो इसे एल नीनो (El Niño) प्रभाव कहा जाता है। एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। यह दुनिया भर में हवाओं, वायुमंडलीय गतिविधियों और वर्षा को प्रभावित करती है।
भारत के लिए यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि इसके कारण दक्षिण पश्चिम मानसून में सामान्य से कम वर्षा होने का संकट बढ़ जाता है। यदि एल नीनो प्रभाव बढ़ता है, तो आने वाले समय में भारत के विभिन्न भागों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। इससे जल स्रोतों पर दबाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।
सर्दियों के आखिरी महीनों में यदि तापमान बढ़ता है, तो गेहूँ की पैदावार प्रभावित हो सकती है। तापमान, वर्षा और मौसम के बदलाव पर दृष्टि रखना भारत के लिए अहम हो गया है। आने वाले महीनों में मौसम किस ओर करवट लेगा। इसी से निश्चित होगा कि एल नीनो का भारत पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

