80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति ने दिया देशवासियों को ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का संदेश
- न्यूज़ डेस्क
- 15/08/2026
- राष्ट्रीय
- राष्ट्रपति, स्वतंत्रता दिवस
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80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार (14 अगस्त, 2026) को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने सम्बोधन की शुरुआत में सबसे पहले सभी देशवासियों को भारत के राष्ट्रीय पर्व ‘स्वतंत्रता दिवस’ की शुभकामनाएं दीं और कहा, “अब से कुछ ही घंटों बाद, हमारे देश की स्वाधीनता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा। 15 अगस्त 1947 के दिन भारत माता पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुई”।
राष्ट्रपति ने भारत के तिरंगे को स्वाधीनता का प्रतीक प्रतीक बताया और कहा कि हम सभी इसे पूरी शान से फहराते हैं।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सभी देशवासी, स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बनें। हम भारत के लोग, अपने सपनों को साकार करने के अवसरों का उपयोग कर सकें, और भारत को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की भावना से कार्य करें – इसी में स्वतंत्रता की सार्थकता है।
सभी देशवासी अपने-अपने स्थान पर देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने तीनों सेनाओं के जवानों, सशस्त्र बलों और पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा की विशेष सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने विश्व पटल पर देश का मान-सम्मान बढ़ाने वाले प्रवासी भारतीयों और अन्य देशों में भारत के दूतावासों में कार्यरत भारतवासियों की भी प्रसंशा की।
हम स्वाधीनता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। हमारा संकल्प है कि विकास का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे, हम अंत्योदय की इसी भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी समेत भारत की उन महान विभूतियों को नमन किया, जिनके आदर्शों पर चलते हुए भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा कि आज (14 अगस्त, 2026) के दिन को हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं। हम उन देशवासियों को याद करते हैं, जिन्होंने विभाजन के समय हुई हिंसा में अपने प्राण गवांए और उस समय की सबसे बड़ी मानव त्रासदी को झेलने के लिए मजबूर हुए।
लौहपुरुष सरदार बलभभाई पटेल को स्मरण करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ तब हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, 550 से अधिक रियासतों को नवस्वाधीन भारत के साथ जोड़ना। श्री पटेल ने राजशाही का अंत कर, भारत में उनका विलय कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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