100 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी “विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए नशा मुक्त युवा” अभियान का शुभारंभ
- न्यूज़ डेस्क
- 02/08/2026
- नई दिल्ली
- नशा मुक्त युवा, पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं को नशे की घातक आदत से जागरूक करने और उन्हें इससे दूर रखने के लिए 100 सप्तक के नशा मुक्ति अभियान का शुभारंभ किया।
- पहले ही दिन 01 करोड़ से अधिक युवाओं ने ली नशा मुक्ति की शपथ।
- प्रधानमंत्री ने इस अभियान को नैशनल प्रोजेक्ट बताया और देशवासियों से इसके साथ जुडने की अपील की।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (02 अगस्त, 2026) को “विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए नशा मुक्त युवा” नामक 100 सप्तक के राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने इस अभियान का प्रारंभ वर्चुअल माध्यम से किया, जिसमें 28,000 स्थानों से 1 करोड़ युवाओं से अधिक ने भाग लिया। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “देश का युवा तन से स्वस्थ हो, मन से स्वस्थ हो, आत्मविश्वास से भरपूर हो और ड्रग्स जैसी घातक आदत से दूर रहे।” यही इस अभियान का उद्देश्य है।
इस अभियान को गत वर्ष वाराणसी (काशी) में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रारंभ किया गया था, जिसकी रूपरेखा अब तैयार की जा चुकी है। श्री मोदी ने आगे कहा कि यह अभियान एक नैशनल प्रोजेक्ट बन गया है। पीएम ने नशे के दुष्परिणाम बताते हुए कहा कि जब कोई युवा ड्रग्स के चंगुल में फंस जाता है, तो एक सपना हार जाता है। परिवार हार जाता है, टूट जाता है। समाज से नफरत का शिकार बन जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दुश्मन देश को निशाने पर लेते हुए कहा कि दुश्मन देश भी युवाओं को नशे की लत में खींचने के लिए कोई कोशिश वाकई नहीं रखते हैं। ड्रग्स सप्लाइ करके कमाई करना और हमारे जैसे देश को टवाह करना ये भी उनकी आतंकी शाजिस का हिस्सा है।
ड्रग्स पर आगे श्री मोदी ने कहा कि ड्रग्स कुछ समय के लिए हाई (आनंद) देता है, लेकिन आपके करिअर और आपकी लाइफ को लो (कम) कर देता है। हमें नशे को किसी भी तरह की स्वीकार्यता नहीं देनी है।
प्रधानमंत्री ने नशे कि आदत से निकालने के लिए समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत को आवश्यक बताया। उन्होंने आगे कहा कि आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की शालाह लें। श्री मोदी ने समाज से आग्रह किया कि ड्रग्स में डूबे लोगों की पहचान उनके अतीत से नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें दूसरा अवसर देना चाहिए।
इस अभियान के साथ अब तक अनेक आध्यात्मिक संगठन, सामाजिक संगठन एवं गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) अब तक जुड़ चुके हैं।


